RTE Admission Ke Baad School Change
यह सवाल हर उस माता-पिता के मन में आता है जिनके बच्चे ने आरटीई कोटे से प्राइवेट स्कूल में दाखिला लिया है, लेकिन अब किसी कारण से स्कूल बदलना चाहते हैं। क्या स्कूल बदला जा सकता है? क्या ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) के बिना दाखिला मिलेगा? क्या सरकारी स्कॉलरशिप बंद हो जाएगी? ये सब सवाल वैध हैं। आज हम इन सबके जवाब देंगे, कानूनी अधिकार बताएंगे और आपको स्टेप बाय स्टेप प्रोसेस समझाएंगे।
सबसे पहले सीधा जवाब: हाँ, आरटीई एक्ट के तहत स्कूल बदलना पूरी तरह से संभव है। यदि आपने हाल ही में RTE MP Allotment Result 2026 के माध्यम से एडमिशन लिया है और अब संतुष्ट नहीं हैं, तो यह आपका कानूनी अधिकार है कि आप प्रक्रिया का पालन कर स्कूल बदल सकें. अब जानते हैं कैसे.
Your Right to Change School
What Section 5 of RTE Act Says
आरटीई अधिनियम 2009 की धारा 5 स्पष्ट रूप से कहती है कि किसी भी बच्चे को उसकी प्रारंभिक शिक्षा (कक्षा 1 से 8) के दौरान एक स्कूल से दूसरे स्कूल में स्थानांतरित होने का अधिकार है। यह अधिकार तब भी लागू होता है जब बच्चा आरटीई कोटे के तहत दाखिला ले चुका हो। कानून के शब्दों में – “No child shall be denied admission for want of transfer certificate, and delay in producing transfer certificate shall not be a ground for either delaying or denying admission.”
यानी कानून आपके बच्चे के साथ खड़ा है। आपको बस इस अधिकार की जानकारी होनी चाहिए और सही प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।
What Schools Cannot Do
बहुत से स्कूल अभिभावकों को डराते हैं। वे कहते हैं – “टीसी के बिना एडमिशन नहीं होगा” या “पूरा साल का फीस चुकाओ तब टीसी देंगे”। यह पूरी तरह गलत है। एनसीपीसीआर (राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग) ने मई 2024 में एक आरटीआई के जवाब में साफ कर दिया कि कोई भी स्कूल आरटीई के तहत दाखिला लेने वाले बच्चे का ट्रांसफर सर्टिफिकेट रोक नहीं सकता, भले ही फीस बकाया हो। स्कूल “टीसी को हथियार” नहीं बना सकता।
What Courts Have Said
बॉम्बे हाईकोर्ट, मद्रास हाईकोर्ट और कई अन्य अदालतों ने बार-बार यह सिद्धांत दोहराया है कि आरटीई एक्ट के तहत दाखिला पाने वाले बच्चों के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता। हाल ही में 9 मार्च 2026 को नागपुर बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया, जिसमें कहा गया कि 1 किलोमीटर के दायरे में स्कूल न होने पर बच्चे को प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकता। यह फैसला आरटीई के तहत स्कूल चुनने के अधिकार को और मजबूत करता है।
Common Myths About School Transfer

Myth 1: TC is Mandatory
अक्सर माता-पिता सोचते हैं कि बिना टीसी के नए स्कूल में दाखिला ही नहीं मिलेगा। लेकिन यह सच नहीं है। धारा 5(3) के तहत, भले ही टीसी बनने में देरी हो, स्कूल एडमिशन नहीं रोक सकता। आप नए स्कूल में आवेदन करते समय बताएँ कि टीसी की प्रक्रिया चल रही है। स्कूल को आपको एडमिशन देना ही होगा।
Myth 2: Transfer Only After One Year
कई स्कूल यह शर्त रखते हैं कि एक शैक्षणिक सत्र पूरा किए बिना ट्रांसफर नहीं हो सकता। यह भी गलत है। आरटीई एक्ट में ऐसी कोई शर्त नहीं है। आप किसी भी महीने, किसी भी समय ट्रांसफर का आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते दूसरे स्कूल में आरटीई कोटे की सीट खाली हो।
Myth 3: RTE Benefits Will Stop
यह सबसे बड़ी भ्रांति है। आरटीई के तहत मिलने वाली फीस प्रतिपूर्ति (रिम्बर्समेंट) बच्चे से जुड़ी होती है, स्कूल से नहीं। जब आप नए स्कूल में जाते हैं, तो नए स्कूल को यह राशि मिलती रहेगी। बस ध्यान रखें कि नए स्कूल ने भी आरटीई कोटे में सीट स्वीकार की हो और आपने औपचारिक ट्रांसफर करवा लिया हो।
State Wise Rules and Recent Changes
Maharashtra’s 1km Rule and Court Stay
महाराष्ट्र सरकार ने फरवरी 2026 में एक नियम लागू किया था कि आरटीई दाखिले के लिए बच्चे के घर से 1 किलोमीटर के अंदर का स्कूल ही चुना जा सकता है। यह नियम कई ग्रामीण इलाकों में असंभव साबित हुआ। शंकर अत्राम जैसे अभिभावकों को कोई स्कूल नहीं मिला। 9 मार्च 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस नियम पर रोक लगा दी और कहा कि यह आरटीई एक्ट और संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 21A का उल्लंघन है। अब फिर से 3 किलोमीटर तक के स्कूल चुने जा सकते हैं।
Tamil Nadu’s Strong Transfer Rights
तमिलनाडु में मद्रास हाईकोर्ट के पुराने फैसलों से यह स्पष्ट है कि टीसी न मिलने पर भी एडमिशन देना अनिवार्य है। राज्य सरकार ने भी आरटीई पोर्टल पर सीधे ट्रांसफर का विकल्प दिया है।
Other States at a Glance
| राज्य | ट्रांसफर के नियम |
|---|---|
| गुजरात | ऑनलाइन पोर्टल पर दूसरे राउंड में स्कूल बदलने की सुविधा। 2025-26 में 93,860 सीटों पर 28.86 लाख आवेदन। |
| कर्नाटक | बीईओ और चाइल्ड राइट्स ट्रस्ट के माध्यम से शिकायत निवारण की मजबूत व्यवस्था। |
| उत्तर प्रदेश | पांचवें राउंड तक स्कूल बदलने की अनुमति। |
| तेलंगाना | टीसी में देरी पर भी एडमिशन देने का नियम। |
Step by Step Process to Change School
Step 1: Find a School with RTE Vacancy
सबसे पहले उस स्कूल की पहचान करें जहाँ आप अपने बच्चे को ट्रांसफर करना चाहते हैं। वह स्कूल आरटीई कोटे के तहत सीटें भरता हो। यह जानकारी राज्य के आरटीई पोर्टल पर मिलती है। कुछ राज्यों में पोर्टल पर वैकेंसी की लिस्ट भी दिखती है। आप स्कूल जाकर भी पूछ सकते हैं।
Step 2: Apply Through the Right Channel
ज्यादातर राज्यों में ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था है। उदाहरण के लिए महाराष्ट्र में student.maharashtra.gov.in पर जाकर आवेदन करना होता है। कुछ राज्यों में आप सीधे स्कूल में भी आवेदन कर सकते हैं। ध्यान रखें कि आप आवेदन में पुराने स्कूल का नाम और ट्रांसफर की वजह स्पष्ट रूप से लिखें।
Step 3: Request Transfer Certificate
अब पुराने स्कूल से टीसी मांगें। लिखित आवेदन दें। अगर स्कूल टीसी देने से मना करे, तो उन्हें धारा 5 और एनसीपीसीआर की स्पष्टता की कॉपी दिखाएँ। अगर फिर भी न दें, तो अगले सेक्शन में दी गई शिकायत प्रक्रिया अपनाएँ।
Step 4: Complete Admission in New School
नए स्कूल में एडमिशन फॉर्म भरें। टीसी नहीं मिली है, तो भी एडमिशन देना स्कूल का कर्तव्य है। आप एक शपथ पत्र दे सकते हैं कि टीसी जल्द जमा कर देंगे। स्कूल को यह स्वीकार करना होगा।
Step 5: Ensure Continuity of RTE Benefits
नए स्कूल में एडमिशन के बाद, स्कूल प्रबंधन से कहें कि वे आपके बच्चे का नाम आरटीई रिम्बर्समेंट सूची में शामिल करें। पुराने स्कूल से टीसी मिलते ही उसे नए स्कूल में जमा कर दें। इससे फीस प्रतिपूर्ति का सिलसिला बना रहेगा।
Documents You Will Need
भले ही टीसी में देरी हो, नीचे दिए गए दस्तावेज़ों की सूची तैयार रखें:
- आरटीई एडमिशन लेटर (पुराने स्कूल से)
- बच्चे का आधार कार्ड
- अभिभावक का आधार कार्ड
- जन्म प्रमाण पत्र
- पिछली कक्षा की रिपोर्ट कार्ड
- निवास प्रमाण पत्र (राशन कार्ड, बिजली बिल आदि)
- टीसी न मिलने की स्थिति में एक हलफनामा (शपथ पत्र)
What to Do If School Refuses Transfer
Who to Complain To
यदि स्कूल टीसी नहीं दे रहा या नए स्कूल में एडमिशन रोक रहा है, तो आपको शिकायत का सोपान (एस्कलेशन मैट्रिक्स) याद रखना चाहिए:
- स्कूल प्रिंसिपल – लिखित आवेदन दें, रसीद लें।
- खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) – 7 दिन में कार्रवाई न हो तो बीईओ में शिकायत करें।
- जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) – बीईओ में भी सुनवाई न हो तो डीईओ को पत्र लिखें।
- राज्य आरटीई सेल – अंतिम उपाय के रूप में राज्य स्तर पर शिकायत दर्ज कराएँ।
- एनसीपीसीआर – बाल अधिकार आयोग को ई-मेल या पोर्टल पर शिकायत भेजें।
Sample Complaint Format
शिकायत में निम्न बातें जरूर लिखें:
- बच्चे का नाम, कक्षा, आरटीई आईडी (यदि है)
- स्कूल का नाम और पता
- कब और कैसे मना किया गया (तारीख, संदर्भ)
- कानूनी आधार (धारा 5, एनसीपीसीआर का सर्कुलर)
- आपकी अपेक्षा – टीसी तुरंत जारी करने या एडमिशन देने का आदेश
शिकायत की कॉपी अपने पास रखें, और सभी स्तरों पर अद्यतन (अपडेट) लेते रहें।
Real Examples of Parents Who Succeeded
Case Study 1: Ashish Fulzele from Chandrapur
आशीष फुलझेले, चंद्रपुर जिले के निवासी, अपने बच्चे का आरटीई दाखिला कराना चाहते थे। लेकिन 1 किलोमीटर के दायरे में कोई स्कूल न होने के कारण वे आवेदन ही नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। 9 मार्च 2026 को कोर्ट ने 1 किमी के नियम पर रोक लगा दी और कहा कि यह नियम आरटीई एक्ट और संविधान के खिलाफ है। अब आशीष और उनके जैसे सैकड़ों अभिभावक 3 किमी दायरे के स्कूलों में आवेदन कर सकते हैं।
Case Study 2: Ajay Merchant’s RTI Victory
अजय मर्चेंट, बेंगलुरु के एक अभिभावक, जिनका बच्चा आरटीई से पढ़ रहा था, स्कूल ने टीसी रोक ली। उन्होंने एनसीपीसीआर में आरटीआई दायर की और पूछा कि क्या स्कूल टीसी रोक सकता है। एनसीपीसीआर ने मई 2024 में स्पष्ट किया कि “कोई भी स्कूल आरटीई एक्ट के तहत दाखिला लेने वाले बच्चे का ट्रांसफर सर्टिफिकेट नहीं रोक सकता, चाहे फीस बकाया हो।” इस आरटीआई के बाद अजय को टीसी मिली और आज यह जवाब हजारों अभिभावकों के काम आ रहा है।
Key Statistics You Should Know
| आँकड़ा | विवरण | स्रोत |
|---|---|---|
| ₹2000 करोड़+ | महाराष्ट्र सरकार पर आरटीई रिम्बर्समेंट की बकाया राशि (2026) | द इंडियन एक्सप्रेस |
| 1,14,732 | महाराष्ट्र में 2026 में आरटीई की कुल सीटें | द इंडियन एक्सप्रेस |
| 2,42,276+ | महाराष्ट्र में 2026 में आवेदन | द इंडियन एक्सप्रेस |
| 93,860 | गुजरात में 2025-26 में आरटीई सीटें | जागरण |
| 28,86,274 | गुजरात में पहले राउंड में आवेदन | जागरण |
| 2-3% | उन अभिभावकों का अनुपात जिन्हें 3 किमी से दूर स्कूल मिलते हैं (महाराष्ट्र) | द इंडियन एक्सप्रेस |
| 15-17% | उन अभिभावकों का अनुपात जिन्हें 1-3 किमी के बीच स्कूल मिलते हैं | द इंडियन एक्सप्रेस |
क्या आप जानते हैं कि हर साल हजारों बच्चे आरटीई के तहत स्कूल बदलते हैं, लेकिन ज्यादातर अभिभावक अपने अधिकारों से अनजान होते हैं? क्या आप चाहेंगे कि आपका बच्चा भी कानूनी अधिकार न जानने के कारण परेशान हो?
Frequently Asked Questions
1. क्या मैं आरटीई एडमिशन के तुरंत बाद स्कूल बदल सकता हूँ?
हाँ, आप किसी भी समय ट्रांसफर के लिए आवेदन कर सकते हैं। कोई न्यूनतम अवधि की शर्त नहीं है।
2. अगर स्कूल टीसी देने से मना करे तो क्या करें?
स्कूल को धारा 5 और एनसीपीसीआर के सर्कुलर की कॉपी दें। फिर भी न माने तो बीईओ या डीईओ में लिखित शिकायत करें।
3. क्या टीसी के बिना नए स्कूल में एडमिशन मिल जाएगा?
हाँ। धारा 5(3) के अनुसार टीसी में देरी होने पर भी एडमिशन नहीं रोका जा सकता। आप शपथ पत्र दे सकते हैं।
4. क्या नए स्कूल में भी आरटीई की फीस प्रतिपूर्ति जारी रहेगी?
जी हाँ। रिम्बर्समेंट बच्चे से जुड़ी है। बस नए स्कूल को सूचित करें और ट्रांसफर की जानकारी पोर्टल पर अपडेट करवाएँ।
5. क्या माइनॉरिटी स्कूल (अल्पसंख्यक स्कूल) आरटीई ट्रांसफर देने से मना कर सकते हैं?
माइनॉरिटी स्कूल आरटीई एक्ट के दायरे में नहीं आते, लेकिन यदि उनका अल्पसंख्यक दर्जा “केप्ट इन एबेयेंस” है, तो उन्हें आरटीई नियम मानने होंगे।
6. क्या मैं कक्षा 8 में स्कूल बदल सकता हूँ?
हाँ, आरटीई प्रारंभिक शिक्षा (कक्षा 1-8) के लिए है। कक्षा 8 में भी ट्रांसफर संभव है।
7. ट्रांसफर के लिए कितने स्कूल चुन सकते हैं?
महाराष्ट्र में 10 स्कूल चुनने की सुविधा है। अन्य राज्यों में भी 5-10 स्कूलों का विकल्प होता है।
8. अगर नए स्कूल में आरटीई की सीट खाली न हो तो क्या करें?
आप किसी दूसरे स्कूल में आवेदन कर सकते हैं। राज्य पोर्टल पर वैकेंसी की सूची नियमित रूप से देखते रहें।
9. क्या ट्रांसफर के लिए अलग से कोई शुल्क देना होता है?
नहीं। आरटीई के तहत किसी भी प्रकार का कैपिटेशन फीस या अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जा सकता।
10. ऑनलाइन आवेदन करने में परेशानी हो रही है, क्या मदद मिल सकती है?
हाँ, आप अपने नजदीकी सरकारी स्कूल या बीईओ कार्यालय में जाकर मदद मांग सकते हैं। कई राज्यों में हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं।
Conclusion
आरटीई एडमिशन के बाद स्कूल बदलना आपका कानूनी अधिकार है। धारा 5 आपके साथ है। एनसीपीसीआर ने टीसी के मामले में स्पष्टता दे दी है। हाईकोर्ट भी आपके हक में फैसला दे चुके हैं। फिर भी, जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। अपने अधिकारों को जानें, सही प्रक्रिया अपनाएँ और किसी भी अवैध रोक का सामना शिकायत तंत्र के माध्यम से करें। अब आपके पास हर जरूरी जानकारी है। सवाल यह है कि क्या आप इस अधिकार का इस्तेमाल करेंगे, या चुपचाप बच्चे को उस स्कूल में पढ़ने देंगे जहाँ वह खुश नहीं?
याद रखें: जब तक आप चुप रहेंगे, स्कूल अपने मनमाने नियम थोपते रहेंगे। आवाज उठाने का अधिकार आपको कानून देता है। बस जरूरत है जागरूकता और सही दिशा में कदम बढ़ाने की.
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